यादों के आइने में राजीव गांधी
राजीव गांधी एक नायक थे। देश के ऐसे नायक जो विश्व-पटल पर तेज़ी से अपनी जगह बनाते हुए नज़र आए। देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के तौर पर लोकप्रिय राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय मंचों की शोभा भी होते थे। देश को आज भी अपने लोकप्रिय नेता की कमी महसूस होती है। वैसे नेता, जिस संचार-क्रांति की वजह से ख़ास तौर पर याद किया जाता है।
इंदिरा गांधी और फिरोज़ गांधी की सबसे बड़ी संतान ने दून स्कूल से शिक्षा हासिल करने के बाद उच्च-अध्ययन के लिए भारत छोड़ दिया था। विदेश प्रवास के दौरान ही 1965 में सोनिया माइनो से उनकी मुलाक़ात हुई जिनसे माइनो परिवार के शुरुआती विरोध के बावजूद उन्होंने 28 फरवरी 1968 को विवाह किया। राजीव राजनीति में क़दम रखने के इच्छुक नहीं थे लेकिन अनुज संजय गांधी की एक विमान दुर्घटना में असमय मौत के बाद परिस्थितियों से मजबूर होकर उन्होंने 11 मई 1981 को कांग्रेस (ई) की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की और 15 जून 1981 को उत्तर प्रदेश के अमेठी संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए जहाँ से मौजूदा समय में उनके पुत्र राहुल गांधी सांसद हैं। इससे पहले इंडियन एयरलाइन्स के पायलट के तौर पर काम कर चुके राजीव को दो फरवरी 1983 को कांग्रेस का महासचिव नियुक्त किया गया। 31 अक्टूबर 1984 को उन पर भारी विपदा आई लेकिन देश की बागडोर संभालने की ज़िम्मेदारी भी मिली। उस दिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई और देश का राजीतिक माहौल डाँवाडोल हो गया। ऐसे नाज़ुक़ वक़्त में राजनीति से अछूते राजीव के कंधे पर प्रधानमंत्री जैसे ज़िम्मेदार पद का बोझ पड़ गया जिसे उन्होंने आने वाले समय में बख़ूबी निभाया। उन्होंने देश में कई क्षेत्रों में नई पहल और शुरुआत की जिनमें संचार-क्रांति, कंप्यूटर क्रांति शिक्षा का प्रसार 18 साल के युवाओं को मताधिकार, लाइसेंस-परमिट राज की समाप्ति आदि शामिल हैं। राजीव ने कई साहसिक क़दम उठाए जिनमें श्रीलंका में शांति सेना का भेजा जाना, असम समझौता, मिज़ोरम समझौता आदि शामिल हैं। 21वीं सदी के भारत के बारे में राजीव के विचार स्पष्ट थे। उन्होंने कहा था कि भविष्य में होने वाले सभी परिवर्तनों को पहले से नहीं बताया जा सकता। इतिहास पूर्वनियोजित या पूर्वनिर्धारित नहीं होता। घटनाएँ इसलिए मोड़ लेती हैं कि व्यक्ति फ़ैसला लेता है। उन्होंने अपनी इस बात को पुष्ट करते हुए कहा था कि आइंस्टीन पदार्थ और ऊर्जा के बीच के संबंध को सामने लाता है। एक लेनिन, एक गांधी, एक माओ और हो-ची-मिन्ह क्रांति का नेतृत्व करता है। एक जवाहर लाल नेहरू अपना ही लोकतांत्रिक जज़्बा पूरे देश को दे देता है। असंभव संभव हो जाता है।
इंदिरा की मृत्यु के बाद हुए 1984 के आम चुनावों में राजीव के नेतृत्व में कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत हासिल किया और पार्टी ने 542 लोकसभा सीटों में 441 पर कब्ज़ा किया लेकिन 1989 आते-आते बोफ़ोर्स की प्रेत छाया में यह बहुमत हाथ से ख़िसक गया और वे नवंबर 1989 में विपक्ष के नेता बने। अपने राजनीतिक फ़ैसलों से कट्टरपंथियों को नाराज़ कर चुके राजीव पर श्रीलंका में सलामी गार्ड के निरीक्षण के वक़्त हमला किया गया लेकिन वे बाल-बाल बच गए थे पर 1991 में ऐसा नहीं हो सका। तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक आत्मघाती हमले में वे मारे गए। उनके साथ 17 और लोगों की जान गई।
राजीव की देश सेवा में अहम् योगदान के लिए उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया, जिसे सोनिया गांधी ने 6 जुलाई 1991 को अपने पति की ओर से ग्रहण किया।



